Read Time:2 Minute, 12 Second
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने नाम के कारण उन्हें लंबे समय तक सामाजिक असहजता झेलनी पड़ी। पढ़ाई, नौकरी या किसी काम से बाहर जाते समय जैसे ही गांव का नाम बताते तो कई बार ताने सुनने पड़ते और मजाक उड़ाया जाता। इससे खासकर युवाओं का मन आहत होता था। कई लोग तो बाहरी जगहों पर गांव का नाम बताने से भी कतराने लगे थे। अब चंदनपुर नाम मिलने से वर्षों से दबा आत्मसम्मान फिर से जीवित हो उठा है।
हर आंगन में उत्सव, हर दिल में सुकून
चंदनपुर बना यह गांव अब केवल नाम बदलने की कहानी नहीं है। यह उस सामाजिक सोच का प्रतीक है, जहां अपमानजनक पहचान से मुक्ति और सम्मानजनक जीवन की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला बताता है कि समाज अब संवेदनशील हो रहा है और हर व्यक्ति की गरिमा को महत्व दिया जा रहा है। आज चंदनपुर के हर आंगन में खुशी का माहौल है। महिलाएं एक-दूसरे को मिठाई खिला रही हैं, युवा नए सपनों की बातें कर रहे हैं और बुजुर्ग पुराने दिनों की पीड़ा को पीछे छोड़ नई शुरुआत का आशीर्वाद दे रहे हैं।
